Kahaniya :- जिद पर अड़े बच्चे को समझाना बच्चों का खेल नहीं

Akbar Aur Birbal Kahaniya :- एक दिन बीरबल दरबार में देर से पहुंचे। जब बादशाह ने देरी का कारण पूछा तो उन्होंने बताया, ‘मैं क्या करता हुजूर! मेरे बच्चे आज जोर-जोर से रोकर कहने लगे कि दरबार में न जाऊं। किसी तरह उन्हें बहुत मुश्किल से समझा पाया कि मेरा दरबार

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सबकी सोच एक जैसी

Akbar Aur Birbal Ki Kahaniya :- दरबार की कार्यवाही चल रही थी। सभी दरबारी एक ऐसे प्रश्न पर विचार कर रहे थे जो राज-काज चलाने की दृष्टि से बेहद अहम न था। सभी एक-एक कर अपनी राय दे रहे थे। बादशाह दरबार में बैठे यह महसूस कर रहे थे कि सबकी

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आग के बीज भाग – 1

आदि काल के मनुष्यों को अग्नि (आग) के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इस काल में कोई यह नहीं जानता था की आग क्या होती है। रौशनी न होने के कारण रात भी अंधेरी और डरावनी होती थी। तेज़ ठण्ड, डर और अँधेरे में वो सिमट कर सोते थे। आग

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भिक्षुक का जादू भाग – 2

अगस्त चंद्रमा उत्सव के दिन गांव के चौराहे की ओर जाने वाला रास्ता उन किसान और व्यापारियों से भरा हुआ था जो बाजार में बेचने के लिए अपना सामान ले जा रहे थे। फू नान के माता-पिता गोभी की टोकरियां उठाये हुए बाजार की ओर जा रहे थे। जब फू

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भिक्षुक का जादू भाग – 1

बहुत समय पहले चीन के एक गांव में एक दिन एक अजनवी आए। एक बच्चा जिसका नाम फू नान था जो अपने माता-पिता के साथ गांव के बाहर फार्म में रहता था, सबसे पहले उस अजनबी से मिला। उसे लगा कि वो शायद एक घुमक्कड़ सन्यासी थे। वैसे भी उसने

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